बादशाहपुर, 25 मार्च (अजय) : गुरुग्राम स्थित पोलारिस हॉस्पिटल के ऑर्थोपेडिक्स और जॉइंट रिप्लेसमेंट निदेशक डॉ. टी. श्रृंगारी ने घुटने के ऑपरेशन के क्षेत्र में एक नई क्रांतिकारी तकनीक की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि अत्याधुनिक रोबोटिक तकनीक और ऑक्सिनियम इम्प्लांट के अद्वितीय गुणों के संयोजन से अब सर्जरी अधिक सटीक, टिकाऊ और मरीज-केंद्रित हो गई है। डॉ. श्रृंगारी ने बताया यह अभिनव तरीका सर्जिकल सटीकता को बढ़ाता है, इम्प्लांट की दीर्घायु सुनिश्चित करता है और मरीजों के परिणामों में महत्वपूर्ण सुधार लाता है। उन्होंने बताया कि ऑक्सिनियम, एक पेटेंट ऑक्सीडाइज़्ड ज़िरकोनियम मिश्र धातु है, जो अत्यधिक पहनाव प्रतिरोध और जैव-संगतता के लिए जाना जाता है। इसकी सतह पारंपरिक धातु मिश्र धातुओं की तुलना में दोगुनी कठोर होती है, जिससे इम्प्लांट की उम्र लंबी होती है। जब इस इम्प्लांट को रोबोटिक-असिस्टेड तकनीकों के साथ उपयोग किया जाता है, तो सर्जनों को इम्प्लांट की स्थिति में असाधारण सटीकता प्राप्त होती है। इससे सॉफ्ट टिशू को कम नुकसान होता है, जोड़ों का संरेखण बेहतर होता है, और मरीज की रिकवरी तेज होती है। इस संयोजन के लाभों के बारे में बताते हुए डॉ. श्रृंगारी कहते हैं रोबोटिक तकनीक की सटीकता और ऑक्सिनियम की टिकाऊ विशेषताओं के कारण हमें बेहतर परिणाम मिलते हैं। मरीजों को कम दर्द, तेज गतिशीलता और लंबे समय तक चलने वाले इम्प्लांट मिलते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि यह तकनीक सक्रिय जीवनशैली वाले मरीजों और धातु से एलर्जी वाले लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है। इस अत्याधुनिक प्रक्रिया से मरीजों की सर्जरी का अनुभव तो बेहतर होता ही है, साथ ही गंभीर गठिया और जोड़ विकृति से जूझ रहे लोगों का जीवन स्तर भी पूरी तरह बदल जाता है। भविष्य में यह तकनीक ऑर्थोपेडिक देखभाल में नए मानक स्थापित करती रहेगी।